मै यह लेख मेरे पूज्य पिता और गुरु स्व.डॉ.चंद्रकांत विनायक देसाई "वैद्य जी "को उनकी तृतीय मास की पुण्य तिथि पर श्रद्धा सुमन रूप में सार्वजनिक हित में जनजागृती हेतू प्रकाशित है.
मै यह लेख मेरे पूज्य पिता और गुरु स्व.डॉ.चंद्रकांत विनायक देसाई "वैद्य जी "को उनकी द्वितीय मास की पुण्य तिथि पर श्रद्धा सुमन रूप में अर्पित कर रहा हूं। लेख का उद्देश्य योग्य आहार के प्रति सार्वजनिक हित में जन जागरूकता लाना है.
◆"आयुर्वेद: जीवन का विज्ञान और स्वास्थ्य का रक्षण" प्राचीन इतिहास से ज्ञात होता है कि यह एक साइंस ऑफ लाइफ है। आयुर्वेद आयुष्य का वेद है ,यह अथर्ववेद का उपांग है। स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन कैसे जिया जाए उनसिद्धांतों एवं पद्धति से संबंधित शास्त्र है , जिसका मुख्य उद्देश्य मानव का संपूर्ण जीवन सुखमय हो उसका प्रयत्न करना और स्वत व्यक्ति का स्वास्थ रक्षण करना तथा विकारोंका शमन करना है। हिताहितं सुखं दुःखमायुस्तस्य हिताहितम्। मानं च तच्च यत्रोक्तमायुर्वेदः स उच्यते॥ आयु : कामयमानेनधर्मार्थ सुख साधनम् | आयुर्वेदो उपदेशेषु विधेय : परमादार : ॥ अर्थात- जिस ग्रंथ में हित आयु , अहित आयु, सुखायु, दुखायु के लिये पथ्यापथ्य का प्रमाण, उनका स्वरूप बताया गया है , वह आयुर्वेदशास्त्र है। इसमें मानव का हित , अहित,सुख,दुख ,धर्म, अर्थ आदि का वर्णन है, अतः सभी को इसका परम आदर करना चाहिए। यह केवल चिकित्सा शास्त्र नहीं है। इसमें एक विशिष्ट पद्धति से जीवन कायापन करना और नित्य आहार, विहार, दिनचर्या, रात्रिचर्या का सम्यक उपयोग करना है। इस संबंधमें विस्तृत विवेचन इस शास्त्र में है। यह शास्त्र मानव निर्मित ...
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